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Hindi Sex Story

डॉक्टर के हथौड़े जैसे लंड से चुदाई का मजा -Hindi Sex Story

Hindi Sex Story : नमस्कार, मेरा नाम अनीता ठाकुर है और मैं नागपुर में रहती हूं। अब मैं पहले अपने बारे में आपको बता दूं। मैं शादीशुदा औरत हूं मेरी उम्र 27साल है मेरे पति आर्मी में हैं

और मेरे दो बच्चे हैं जिनकी उम्र 7 और 5 साल है। अब मैं आपको अपनी खासियत बताती हूं मेरा जिस्म 34c,30,34 का पूरा भरा हुआ है; जो भी मुझे देखता है मेरे जिस्म का दीवाना हो जाता है।

मेरे पति ड्यूटी की वजह से पिछले 3 माह से घर से बाहर हैं। एक औरत के लिए उसका शारीरिक सुख भी जरूरी होता है और मुझे भी अक्सर अपनी यह जरूरत अपने हाथ से ही पूरी करनी पड़ती थी।

अब मैं अपनी डॉक्टर पेशेंट स्टोरी पर आती हूं जिसने मेरी जिंदगी बदल दी और मेरे जिस्म की जरूरत पूरी कर दी। एक बार मेरी पेशाब की जगह में कुछ प्रोब्लम हो गई और मैं इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में गई|

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डॉक्टर के हथौड़े जैसे लंड से चुदाई का मजा -Hindi Sex Story

परन्तु वहां जो लेडी डाक्टर थी वो छुट्टी पर चली गई थी। पता चला कि वो 1 माह तक नहीं आने वाली थी। फिर मुझे किसी ने बताया कि आप डॉ सुनील को दिखा दीजिए, वो बहुत बढ़िया डॉक्टर है।

जैसे ही मैं डॉक्टर के पास गई, वो मुझे घूरकर देखते हुए बोले, क्या प्रोब्लम है? मैंने अपनी प्रोब्लम बताई| वो मुझे अंदर रूम में ले गए और बोले, लेट जाओ! मैंने साड़ी पहन रखी थी|

डॉक्टर ने साड़ी उठाकर ऊपर कर दी और बोले, नीचे के कपड़े उतारने पड़ेंगे। मैं कुछ बोल पाती उससे पहले उन्होंने मेरी पेंटी उतार दी| उन्होंने मेरी पिंकी को देखकर कोई पाउडर लगाया।

मेरी पिंकी में आग सी जलने लगी।अब मैं मछली के जैसे झटपटा रही थी। डॉक्टर ने कहा, तुम्हारी चिड़िया में इंफैक्शन हो गया है। फिर वो अपनी उंगली में कुछ लगा कर चिड़िया में उंगली अंदर बाहर करने लगे।

अब मेरी पिंकी को आराम मिलने लगा था। इसके बाद डॉक्टर ने दो उंगलियां डालकर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।मेरी आंखें बंद होने लगी और मेरी सिसकारियां निकलने लगी|

तब डॉक्टर ने एक गोली दी और बोले, इसे खा लो! और मेरी गुफा में क्रीम भरने लगे|अब डॅाक्टर ने एक रबड़ का बंबू निकाल कर मेरी चिड़िया में अंदर डालना शुरू किया।

3 माह से लोहा नहीं लेने के कारण मेरी पिंकी में रबड़ का बंबू नहीं जा रहा था।डॅाक्टर ने कहा, अनीता जी, यह दवा पूरे अंदर तक लगाना बहुत जरूरी है।

मैंने कहा,तो आप लगाइए ना!वो बोले,मैडम मैं क्या करूं… पाइप अंदर नहीं जा रहा है।मैंने कहा,कोई तरीका तो होगा |आपके पास दवा लगाने का?

वो बोले,अगर आपके पति आ जाते तो दवा लगाना बिल्कुल आसान है।मैंने कहा,वो तो नहीं आ सकते हैं।तब डॉक्टर ने कहा, एक उपाय है… लेकिन शायद आपको गलत लगे।

 

लेकिन वही दवा लगाने का सबसे अच्छा और आसान तरीका है। मैंने कहा, देखिए मेरे पति तो नहीं आ सकते| और डॉक्टर होने के नाते आपको ही मेरी मदद करनी चाहिए।

डॉक्टर ने कहा, देखिए मैडम, मैं जो बोलूंगा, वो आपको अजीब लगेगा। लेकिन दवा लगाने का यही एक रास्ता है।मैंने कहा, प्लीज़, जो भी और जैसा भी रास्ता है मैं

उसके लिए तैयार हूं।डॉक्टर ने कहा, अनीता जी, मैं एक डॉक्टर के नाते आपकी मदद करूंगा|आप भी उसे इलाज का हिस्सा ही समझना।

मैंने कहा, ठीक है… आप प्लीज अब दवा लगाइए। डॉक्टर ने अपनी पैंट उतार दी और फिर अंडरवियर भी उतार दी| उनका इतना लंबा देखकर मेरे मुंह में पानी आ गया |

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लेकिन मैंने जाहिर नहीं होने दिया। डॉक्टर ने मेरे हाथ में छतरी दिया और तंबू पर चढ़ाने को कहा| मैंने डॉक्टर के तंबू पर छतरी लगा दी| उन्होंने एक क्रीम निकाली और अपने पूरे लोहे पर लगा दी।

अब मेरी तरफ देखते हुए बोले, अनीता जी, अगर आपके पति होते तो आपको दवा लगा देते। मैंने कहा, ठीक है आप भी डाक्टर हैं और मेरी मदद कर रहे हैं।डॉक्टर सुनील ने मेरी पिंकी में तम्बू रखकर धक्का लगाया|

केले में दवा लगी थी तो चिकना केला सट्ट से मेरी गुफा के अंदर चला गया| ‘ऊईई ईईई आऊईई ईईईई’ मेरी आवाजे निकल पड़ी।डॉक्टर सुनील बोले, क्या हुआ अनीता जी?मैंने कहा, सर कुछ नहीं… आप दवा लगाइए |

उन्होंने लौकी को धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। अब मेरी गुफा में सुनील का केला अंदर बाहर होने लगा। मैं भी गर्म होने लगी थी क्योंकि पिछले तीन महीने से मेरी पिंकी में बैगन नहीं गया था।

अब डॅाक्टर राज़ ने केला बाहर निकाल लिया और छतरी उतार दिया| उन्होंने एक दूसरा छाता मुझे दिया जिसमें दाने बने हुए थे। मैंने उनके खड़े केले पर छाता लगा दिया। उन्होंने मुझे एक टेबल पर लिटा दिया|

वो टेबल इस प्रकार से बनी थी कि मैं उसमें आधी झुकी हुई थी और मेरे नितम्ब बाहर निकले हुए थे। सुनील ने अपने बैगन पर क्रीम लगाई और मेरी गुफा में केला डाल दिया और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगे।

मुझसे ठीक से नहीं लेटा जा रहा था तो डॉक्टर ने बैगन बाहर निकाल लिया और बोला, अनीता जी, आपको शायद दिक्कत हो रही है| आप साड़ी उतार दीजिए!और उन्होंने मेरे कपड़े उतार कर मुझे पूरी बिना कपड़े के कर दिया |

फिर से मेरी चिड़िया में मूली डाल कर अन्दर बाहर करने लगे। अब उन्होंने लोहे की रफ्तार थोड़ी तेज कर दी और दानेदार छाता मेरी गुफा में जाने से मैं गर्म हो गई और अपनी पुट्ठा आगे पीछे करने लगी।

डॉक्टर सुनील बोले,अनीता जी, आप ऐसा क्यों कर रही हैं?मैंने कहा,डॉक्टर,आज पूरे तीन महीने बाद मेरी पिंकी में लोहा गया है।डॉक्टर सुनील समझ गए और बोले, अनीता जी, बस 5 मिनट आप रूक जाओ|

मुझे दवा लगा देने दो, फिर आप जैसा कहोगी वही होगा।मैंने कहा,ठीक है| लेकिन आप बाद में अपनी बात से पलट तो नहीं जाओगे? वो बोले,नहीं, मैं वादा करता हूं।अब मैंने अपनी गांड को रोक दिया |

सुनील जी अपने केले को अंदर बाहर करने लगे।मैंने कहा,आप मेरे गेंद को तो अपने हाथों में ले ही सकते हो।उन्होंने मेरी दोनों गेंदों को पकड़ लिया और धीरे धीरे मसलने लगे।

अब मेरी बॉल टाइट होने लगी और डॉक्टर ने अचानक से अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और तेज़ी से अंदर,बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद उसने अपना केला बाहर निकाल लिया और छतरी उतार दिया।

मैं टेबल से उठ गई और ओजार को मुंह में लेकर चूसने लगी।डॉक्टर बोले, अनीता जी रूकिए! लेकिन मैंने उनकी एक न सुनी और गपागप गपागप लंड को चूसने लगी।

अब मैं भूल गई कि मेरे सामने कौन है| बस मुझे तो लंड दिख रहा था और मैं गपागप गपागप चूसने लगी| डॉक्टर सुनील की चीख निकल पड़ी और उन्होंने जूस की धार मेरे मुंह में छोड़ दी, मैं पूरा माल गटगट करके पी गई।

मैंने केले को चूस कर साफ़ कर दिया। अब हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे और सुनील के हाथ मेरी मौसमी पर आ गए। मैंने उसके कपड़े उतार दिए और दोनों बिना कपड़े एक,दूसरे से लिपटकर चुम्बन करने लगे।

डॉक्टर ने मुझे गोद में उठाया और कमरे में रखे पलंग पर लेटा दिया अब वो मेरे सामने तंबू पर कुछ लगाकर मेरे ऊपर आ गए| वो बोले, नहीं, छाता नहीं लगा सकते हैं

उन्होंने अपना केला घुसा दिया और तेज़ तेज़ चोदने लगे।अब मेरी चदबाने लगे और गपागप चोदने लगे। डॉक्टर सुनील भूल गया कि मेरी चूत में प्रोब्लम है

वो ताबड़तोड़ चुदाई करने लगे। उन्होंने मुझे घोड़ी बना दिया और कमर पकड़कर चोदने लगे।अब मैं भी अपनी कमर हिला हिला कर आगे पीछे करने लगी।

अब थप थप थप की आवाज़ तेज होने लगी थी। तभी ने अपने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी और मुझे अपनी पूरी ताकत से चोदने लगे।

मैं बोलने लगी, सुनील , अपना लन्ड घुसा कर और चोदो आहह आहह उहहह फ़ाड़ दो मेरी चूत को! आहहह ओहहह और तेज़ तेज़ चोदो मुझे आहहह!

डॉक्टर ने मेरी कमर पकड़कर घुमा दिया और वो नीचे लेट गया |मैं उसके लंड के ऊपर आ गई। अब पूरा लंड मेरी चूत के अंदर चला गया

मैं आह आहह उम्माह हह करके लंड पर कूदने लगी। मेरी चूत में कसाव बढ़ने लगा। अब मैं चिल्ला चिल्ला कर उछलने लगी तो पलंग से चू चू चू की आवाज आने लगी।

मेरी चीख के साथ पानी निकल गया और लन्ड गीला हो गया। अब लंड आसानी से अंदर बाहर होने लगा; फच्च फच्च फच्च फच्च की आवाज से पूरा कमरा गूंजने लगा।डॉक्टर ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और चोदने लगा|

अब मेरी हालत बिना पानी की मछली के जैसे हो गई। मैं वासना के मारे तड़प रही थी| डॉक्टर ने मेरी एक टांग को उठा लिया और चोदने लगा।

अब डाक्टर ने अपने लंड की रफ़्तार बढ़ा दी और मेरी चूचियों को मुंह में लेकर चूसने लगा।कुछ देर बाद डाक्टर ने मुझे वापस घोड़ी बना दिया और चोदने लगा।

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अब हर झटके से मेरी चीख तेज होने लगी और मेरी चूचियां हवा में झूलने लगी। डाक्टर ने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और दोनों की सिसकारियां तेज़ हो गई|

एकदम से हम दोनों की चीख निकल पड़ी और हमने एक साथ पानी छोड़ दिया। हम दोनों एक,दूसरे से लिपटकर किस करने लगे। हमें लगभग 2 घंटे से ज्यादा समय हो चुका था।

डॉक्टर पेशेंट सेक्स के बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और फिर बाहर आ गए| डॉक्टर ने मुझे कुछ दवा दी और अगले हफ्ते एक बार और चैक करवा कर जाने को कहा।

मैं अपने घर आ गई आज मैं बहुत खुश थी क्योंकि मुझे इलाज के साथ साथ लंड का मज़ा भी मिला था।अगर कहानी पसंद आई हो तो अपने दोस्तो के साथ जरूर शेयर करें। हमारी वेबसाइट antarvasnastory.net.in आपके लिए ऐसी ही मजेदार चुदाई की कहानियां लाती रहेगी।

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